शिया मुस्लिम कौन हैं?, ईरान शिया देश कैसे बना?..

कौन होते हैं शिया मुसलमान? ईरान क्यों शिया इस्लाम का मुख्य देश बना? और दुनिया में शिया आबादी कहां-कहां फैली है? आइए जानते हैं। इस्लाम के भीतर दो बड़े संप्रदाय हैं सुन्नी और शिया। लेकिन आखिर शिया मुसलमान होते कौन हैं? दरअसल 632 ईसवी में पैगंबर मोहम्मद की मृत्यु के बाद इस्लामी नेतृत्व को लेकर विवाद खड़ा हुआ। एक समूह ने मोहम्मद के चचेरे भाई और दामाद अली को उत्तराधिकारी माना,

इन्हीं अनुयायियों को कहा गया शिया यानी अली के अनुयाई। इनका मानना है कि असली नेतृत्व केवल पैगंबर के परिवार। विशेषकर अली और उनकी संतानों को ही मिलना चाहिए। शिया परंपरा में कुल 12 इमाम माने जाते हैं। जिनमें आखिरी इमाम मोहम्मद अल महदी नौवीं सदी में गायब हो गए और शिया मान्यता में वो मसीहा के रूप में लौटेंगे। शहादत अन्याय के खिलाफ खड़ा होना और मेहंदी की प्रतीक्षा ये शिया इस्लाम की प्रमुख विशेषताएं हैं,

अब जानते हैं कि आखिर ईरान कैसे बना शिया इस्लाम का गढ़। ईरान को आज हम शिया इस्लाम का सबसे बड़ा केंद्र मानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी यही ईरान सुन्नी इस्लाम का गढ़ था। तो फिर ऐसा क्या हुआ कि पूरा देश ही एक नई धार्मिक विचारधारा में तब्दील हो गया। इस ऐतिहासिक बदलाव के पीछे था एक शक्तिशाली राजवंश सफवी वंश जिसने ना सिर्फ सत्ता हासिल की बल्कि धर्मांतरण के जरिए पूरे समाज की पहचान ही बदल दी,

16वीं सदी में सफवी राजवंश ईरान में सत्ता में आया। शाह इस्माइल प्रथम ने 1501 में ईरान को एक आधिकारिक शिया राष्ट्र घोषित किया। उन्होंने शिया अजान लागू की जिसमें अली अल्लाह के दोस्त हैं जोड़ा गया। सुन्नी विचारों को दबाने के लिए धार्मिक हिंसा, जबरन धर्मांतरण और किजिलबाश सेनाओं का सहारा लिया गया। तीन शताब्दियों में ईरान का धार्मिक चेहरा पूरी तरह बदल गया। शिया इस्लाम को स्थापित किया गया और सुन्नी, यहूदी, ईसाई सभी पर दमन हुआ,

शेख मोहम्मद बकर मजलिसी जैसे विद्वानों ने इस वैचारिक बदलाव को मजबूत किया। जिससे ईरान ना सिर्फ शिया राष्ट्र बना बल्कि आधुनिक इस्लामिक गणराज्य की बुनियाद भी रखी गई। आज ईरान, अज़र भाईजान और इराक जैसे देशों में शिया बहुसंख्यक हैं और यह सभी नीतियों का ही ऐतिहासिक परिणाम है,

आज दुनिया में करीब 20 करोड़ शिया मुसलमान हैं। यानी पूरी मुस्लिम आबादी का लगभग 10 से 15%। सबसे ज्यादा शिया आबादी वाले देशों में शामिल है ईरान। जहां लगभग 90% से ज्यादा शिया हैं। अज़रान में 70% से ज्यादा शिया हैं। इराक में 65%, बहरीन में 60 से 65%, लेबन में 30 से 40% और पाकिस्तान में लगभग 15 से 20% वहीं भारत में करीब 3 करोड़ से अधिक शिया मुसलमान हैं,

और सीरिया, यमन और अफगानिस्तान में भी महत्वपूर्ण शिया समुदाय हैं। लेबन में हिजबुल्ला, इराक में शिया मिलीशिया और यमन में हूती विद्रोही ये सभी राजनीति में शिया प्रभाव का हिस्सा हैं। शिया मुसलमानों की कहानी सिर्फ एक धार्मिक संप्रदाय की नहीं है। यह सत्ता, विचारधारा और पहचान की लड़ाई की कहानी है। और इस लड़ाई ने ना सिर्फ ईरान को बदला बल्कि पूरे इस्लामिक विश्व की राजनीति को भी आकार दिया। इस पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताएं.

Leave a Comment